है रात आज की मेराज ए मुस्तफा के लिए...
""""""करैला बाग़ काशान ए हसनैन मुस्तफाबादी में जश्न की महफिल में शायरों ने पढ़े कसीदे""""""
पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद ए मुस्तफा के माहे रजब की छब्बिस को मेराज पर जाने की खुशी में मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में रात भर जश्न का माहौल रहा।उम्मुल बनींन सोसायटी के महासचिव सैय्यद मोहम्मद अस्करी के अनुसार एक दिन पहले से ही मस्जिदों में रंग रोगन कराकर रंगीन झालरों से सजावट कर जश्न की महफिल और तक़रीर की तय्यारी कर ली गई थी।वहीं करैला बाग़ में शायर हसनैन मुस्तफाबादी की ओर से जश्न की महफिल सजाई गई।दो दर्जन से अधिक शायरों ने महफिल में अपने तास्सुरात का इज़हार किया।क़मर दरियाबादी की निज़ामत में हुई महफिल में शायर हाशिम बांदवी ने पढ़ा रवॉं है अहमदे मुरसल का नूर सुए फ़लक!
सितारे तरसा किए अपनी ही ज़ेया के लिए!! हसनैन मुस्तफाबादी ने अपने अन्दाज़ में पढ़ा बंदा कोई इस शान का देखा न सुना है!
क़ौसैन पे कौनैन का सुल्तान गया है!!
शायर रुस्तम साबरी ने अपने तास्सुरात का इज़हार करते हुए अपने इस अश्आर पर जमकर दाद बटोरी।पढ़ा ऐसे कोई जा सकता नहीं अर्श ए बरीं पर!
खालिक़ के बुलाने पे ये मेहमान गया है!!
शायर रौनकों सफीपुरी ने पढ़ा है अर्शे बरीं ज़ेरे क़दम मेरे नबी के!
अब सोचिए क़द कितना मुहम्मद का बड़ा है!!
महफिल के अन्त में मौलाना मोहम्मद अली गौहर ने ईद मेराजुन नबी पर तफसीली तक़रीर की।शायर आज़म मेरठी ,ज़मीर भोपतपुरी ,ज़की अहसन ,फय्याज़ रायबरैलवी ,रौनक़ सफीपुरी ,बाबर ज़हीर दरियाबादी ,शाहिद मुस्तफाबादी ,ऊरुज ग़ाज़ीपुरी ,जलाल सिरसिवी ,मौलाना आमिरुर रिज़वी ,इतरत नक़वी , हाशिम बांदवी ,रुस्तम साबरी ,फरमूद इलाहाबादी ,इरफान लखनवी ,आरिज़ मुस्तफाबादी ,शमशाद मुस्तफाबादी समेत अन्य मुक़ामी व ग़ैर मुक़ामी शायरों ने शान ए मुस्तफा में क़सीदे पढ़ें।रिफाक़त हुसैन ,शाहिद मुस्तफाबादी ,सैय्यद फ़ैज़ हसनैन सैय्यद मोहम्मद अस्करी आदि शामिल रहे।





